आजकल सुबह-शाम हल्की ठंडक, दोपहर में तेज़ धूप और उमस, और बीच-बीच में बारिश। मानसून की विदाई और सर्दी की दस्तक के इस दौर में शरीर को नए मौसम के मुताबिक ढलने में वक्त लगता है। यही वजह है कि इन दिनों सर्दी-खांसी, गले में खराश, पेट की गड़बड़ी और वायरल बुखार के मामले बढ़ने लगते हैं। डॉक्टरों और आहार विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सावधानी और सही खान-पान से इनमें से ज़्यादातर परेशानियों से बचा जा सकता है।
बदलते मौसम में शरीर पर क्या असर पड़ता है?
तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर दबाव पड़ता है। उमस भरे मौसम में खाना जल्दी खराब होता है और बैक्टीरिया तेज़ी से पनपते हैं। इसी कारण फूड पॉइज़निंग, दस्त और एसिडिटी की शिकायतें इस समय आम हो जाती हैं। साथ ही, बारिश का जमा पानी मच्छरों को बढ़ावा देता है, इसलिए साफ-सफाई और सुरक्षित खान-पान दोनों ज़रूरी हैं।
क्या खाएं?
1. मौसमी फल और सब्ज़ियां: संतरा, अमरूद, सेब, पपीता और अनार जैसे फलों में विटामिन-सी और फाइबर होता है, जो इम्यूनिटी को सहारा देता है। हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, गाजर और कद्दू भी थाली में शामिल करें।
2. गर्म और ताज़ा भोजन: दाल, खिचड़ी, सूप और हल्की सब्ज़ियां आसानी से पच जाती हैं। खाना हमेशा ताज़ा और अच्छी तरह पका हुआ खाएं।
3. घरेलू नुस्खे: अदरक, तुलसी, हल्दी और काली मिर्च वाली चाय या काढ़ा गले को आराम देता है। रात को हल्दी वाला दूध पीना भी कई घरों की पुरानी परंपरा है।
4. सूखे मेवे और बीज: बादाम, अखरोट और अलसी के बीज सीमित मात्रा में लेने से ऊर्जा मिलती है।
5. पर्याप्त पानी: ठंडक बढ़ने पर प्यास कम लगती है, लेकिन पानी की ज़रूरत बनी रहती है। उबालकर ठंडा किया हुआ या फ़िल्टर्ड पानी पिएं।
किससे बचें?
- सड़क किनारे कटे फल और खुले में बिकने वाला खाना: उमस में इन पर कीटाणु जल्दी लगते हैं।
- बहुत ज़्यादा तला-भुना और मसालेदार भोजन: इससे एसिडिटी और पेट की समस्या बढ़ सकती है।
- फ्रिज का बहुत ठंडा पानी, आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक: गले में खराश और खांसी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
- बासी और दोबारा गर्म किया हुआ खाना: इससे पेट खराब होने का खतरा रहता है।
- खाने से पहले हाथ धोना न भूलें: यह छोटी आदत कई बीमारियों से बचाती है।
बच्चों और बुज़ुर्गों का रखें खास ध्यान
बच्चों और बुज़ुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए उनके भोजन में ताज़गी और साफ-सफाई का ज़्यादा ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को स्कूल टिफिन में घर का बना हल्का खाना दें और बाहर की चीज़ें कम खिलाएं। डायबिटीज़ या बीपी जैसी बीमारी वाले लोग आहार में बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर तेज़ बुखार तीन दिन से ज़्यादा बना रहे, बार-बार उल्टी-दस्त हो, शरीर में पानी की कमी लगे या सांस लेने में तकलीफ हो, तो घरेलू उपायों के भरोसे न रहें और तुरंत नज़दीकी डॉक्टर से मिलें।
निष्कर्ष:
बदलता मौसम बीमारियां लेकर आए, यह ज़रूरी नहीं। ताज़ा और गर्म भोजन, मौसमी फल-सब्ज़ियां, साफ पानी और थोड़ी सतर्कता, बस यही इस मौसम का सबसे आसान मंत्र है।