लाइफस्टाइल स्वास्थ्य

चाय (tea) पीने से दिल की सेहत पर क्या पड़ता है असर? नई स्टडी में सामने आई अहम जानकारी

चाय (tea)

सुबह की एक कप चाय (tea) सिर्फ आदत नहीं, शायद दिल के लिए भी अच्छी हो सकती है। यही वजह है कि tea heart health को लेकर एक नई बड़ी रिसर्च इस हफ्ते अमेरिका समेत कई देशों में चर्चा में है। लेकिन इसमें एक खास चेतावनी भी है, और वह चाय पीने के तरीके से जुड़ी है।

What did the new study find about daily tea drinking and heart health?

यह सवाल इन दिनों बहुत पूछा जा रहा है, तो सीधे जवाब से शुरू करते हैं। यह रिसर्च Journal of Internal Medicine में छपी है और इसमें चीन के 4,85,934 वयस्कों को औसतन करीब 9 साल तक देखा गया। इस दौरान 14,863 लोगों को दिल या रक्त नलिकाओं से जुड़ी बीमारी हुई, और नियमित चाय पीने वालों में इन बीमारियों का जोखिम 11 प्रतिशत कम पाया गया।

इन बीमारियों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और पेरिफेरल आर्टरी डिजीज़ शामिल थीं, यानी हाथ-पैरों तक खून ले जाने वाली धमनियों का सिकुड़ना। स्टडी के लेखकों में जिचेन ये और उनके साथी शामिल हैं, और यह 21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हुई।

“नियमित चाय” का मतलब क्या है?

यहाँ “रोज़ाना” शब्द थोड़ा ढीला है। CNN के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. लीना वेन ने बताया कि जो लोग हफ्ते में कम से कम तीन दिन चाय पीते थे, उनमें कम पीने वालों की तुलना में संवहनी (वैस्कुलर) बीमारी का जोखिम करीब 11 प्रतिशत कम था। यह नतीजा उम्र, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि, वज़न और मौजूदा बीमारियों जैसे कारकों को ध्यान में रखने के बाद निकला।

ब्लैक टी या ग्रीन टी कौन सी अच्छी है?

अगर आप सोच रहे हैं कि कौन-सी चाय बेहतर है, तो नतीजे दोनों के पक्ष में हैं, पर एक में थोड़ा ज़्यादा। ब्लैक टी का जुड़ाव ज़्यादा तरह की हृदय बीमारियों में कम जोखिम से दिखा, हालाँकि ग्रीन टी में भी फायदे नज़र आए। साथ ही, मध्यम कड़क चाय का संबंध कम जोखिम से पाया गया। यानी बहुत हल्की या बहुत ज़्यादा कड़क, दोनों से बेहतर बीच का रास्ता दिखा।

सबसे चौंकाने वाली बात: बहुत गरम चाय

इस स्टडी की सबसे अलग बात चाय के तापमान से जुड़ी है। जिन लोगों ने बताया कि वे चाय “खौलती हुई” गरम पीते हैं, उनमें चाय न पीने वालों की तुलना में वैस्कुलर बीमारी का जोखिम 16 प्रतिशत ज़्यादा था। मतलब, जिस आदत से फायदा मिल सकता था, वही गरमागरम पीने से उलटा असर करती दिखी।

हालाँकि यहाँ भी सावधानी ज़रूरी है। तापमान की जानकारी लोगों ने खुद बताई थी, शोधकर्ताओं ने उसे नापा नहीं था। यह भी हो सकता है कि बहत गरम चाय पसंद करने वालों की खान-पान या जीवनशैली की दूसरी आदतें अलग हों, जिन्हें पूरी तरह परखा नहीं जा सका। इसलिए इसे पक्का सबूत नहीं, बल्कि एक संकेत मानना ठीक रहेगा।

चाय के साथ हमारी आदतों का असर

एक और दिलचस्प नतीजा यह रहा कि चाय अकेली नहीं, बाकी आदतों के साथ मिलकर काम करती दिखी। सबसे कम जोखिम उन लोगों में मिला जो चाय पीते थे, धूम्रपान नहीं करते थे और शारीरिक रूप से सक्रिय थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे लोगों में जोखिम करीब 45 प्रतिशत कम था।

इसका सीधा मतलब यह है कि सिर्फ चाय पीकर बाकी चीज़ें अनदेखी करने से काम नहीं चलेगा। ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन ने भी कहा है कि कोई एक खाना या पेय दिल की सेहत नहीं बदल देता, पूरा आहार और जीवनशैली कहीं ज़्यादा मायने रखती है।

चाय दिल के लिए अच्छी क्यों हो सकती है?

वैज्ञानिक इसे चाय में मौजूद पौधों के प्राकृतिक यौगिकों से जोड़ते हैं। डॉ. वेन के अनुसार ये यौगिक रक्त नलिकाओं की भीतरी परत की कोशिकाओं की रक्षा कर सकते हैं और धमनियों को फैलने-सिकुड़ने में मदद कर सकते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर और दिल पर दबाव कम हो सकता है। कुछ पुरानी रिसर्च में चाय से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल में हल्का सुधार भी देखा गया है।

यह पहली स्टडी नहीं है

चाय और दिल का रिश्ता पहले भी जाँचा जा चुका है। 2016 में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की एक बैठक में पेश रिसर्च में पाया गया था कि रोज़ एक कप चाय पीने वालों में बड़ी हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम लगभग एक-तिहाई कम था। हाल की एक और स्टडी में, जिसमें पहले से हृदय रोग वाले लोग थे, रोज़ करीब तीन कप चाय पीने वालों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हृदय से जुड़ी मौत का जोखिम 17 प्रतिशत कम मिला। यानी नतीजे एक ही दिशा में जा रहे हैं, पर सबूत की कमजोरी भी हर बार एक जैसी है।

क्या यह साबित करता है कि चाय दिल बचाती है?

नहीं, और यह बात सबसे ज़रूरी है। यह एक observational स्टडी है, यानी यह जुड़ाव दिखा सकती है, पर यह साबित नहीं कर सकती कि चाय ने ही दिल को बचाया। ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की सीनियर डायटीशियन डेल स्टैनफोर्ड ने भी यही कहा है। उनके मुताबिक चाय की मात्रा सिर्फ एक बार नापी गई थी, कप का आकार तय नहीं था, और यह साबित नहीं होता कि ज़्यादा चाय पीने से जोखिम घटा। हो सकता है कि चाय पीने वाले लोग वैसे भी ज़्यादा सेहतमंद आदतों वाले हों।

एक और बात ध्यान देने लायक है। एक रिपोर्ट के अनुसार सबसे कम जोखिम रोज़ छह से आठ कप चाय पर दिखा। पर इसे सलाह की तरह न लें। इतनी चाय में कैफीन भी बहुत हो जाता है, और स्टडी ने यह नहीं कहा कि ज़्यादा पीना बेहतर है। एक पुरानी बड़ी रिसर्च में भी रोज़ चाय पीने वालों का जोखिम कम मिला था, पर मात्रा बढ़ाने से जोखिम और कम नहीं हुआ।

अमेरिका में बहुत से लोग आइस्ड टी पसंद करते हैं, और यहीं एक चूक आसानी से हो सकती है। चाय को बिना अतिरिक्त चीनी के पिएँ, तभी वह दिल के लिए सेहतमंद आहार का हिस्सा बन पाती है। मीठी बोतलबंद चाय में अक्सर बहुत चीनी होती है, जो फायदे को बेअसर कर सकती है।

कुछ आसान बातें याद रखें:

  • चाय को इतना ठंडा होने दें कि मुँह न जले।
  • चीनी कम रखें या बिल्कुल न डालें।
  • रोज़ टहलना और धूम्रपान से दूरी, चाय से कहीं बड़ा फायदा देते हैं।
  • पहले से दिल की बीमारी है तो दवा या डॉक्टर की सलाह की जगह चाय को न दें।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर tea heart health पर यह नई स्टडी अच्छी खबर तो है, पर इसे चमत्कार मानना गलत होगा। नियमित चाय पीना दिल के लिए अच्छे संकेत देता है, खासकर मध्यम कड़क, बिना ज़्यादा चीनी वाली और बहुत गरम न पी जाने वाली चाय। फिर भी असली सुरक्षा संतुलित खाने, कसरत और धूम्रपान से दूरी से मिलती है।

NOTE: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे चिकित्सकीय सलाह न समझें। अपनी सेहत, दवा या खान-पान से जुड़े फैसले लेने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर बात करें।

MrSingh

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