बंगाल की राजनीति में कुछ महीनों से जो उथल-पुथल चल रही है, उसमें अब एक और नया पन्ना जुड़ गया है। बांग्ला सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री कोयल मल्लिक (Koel Mallick), जो कभी TMC की राज्यसभा सांसद थीं, अब BJP की उम्मीदवार हैं। BJP ने रविवार, 4 अक्टूबर को उन्हें राज्यसभा उपचुनाव के लिए उसी सीट से मैदान में उतारने का ऐलान किया, जिसे उन्होंने खुद जुलाई में छोड़ा था। सोमवार, 5 अक्टूबर की सुबह उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली और उसी दिन नामांकन भी भर दिया।

कौन हैं कोयल मल्लिक (Koel Mallick)
कोयल मल्लिक (Koel Mallick) का असली नाम रुक्मिणी मल्लिक है। वे बांग्ला फिल्म जगत के एक बेहद मशहूर परिवार से आती हैं और दिग्गज अभिनेता रंजीत मल्लिक की बेटी हैं। फिल्मों से सीधे राजनीति में आने वाले चेहरों में उनका नाम इसी साल जुड़ा। फरवरी में TMC ने राज्यसभा के लिए उनके साथ पूर्व DGP राजीव कुमार, बाबुल सुप्रियो और वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी को भी उम्मीदवार बनाया था। उस वक्त कोयल ने खुद कहा था कि राजनीति में आने का पहले से कोई इरादा नहीं था।
इस्तीफे से टिकट तक की पूरी कहानी
ताज़ा घटनाक्रम समझने के लिए पीछे देखना होगा। रिपोर्टों के मुताबिक इस साल बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC को बड़ी हार मिली, जिसके बाद पार्टी के अंदर भारी बगावत शुरू हो गई। राज्यसभा में TMC के कई सांसदों ने इस्तीफे दे दिए। सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक पहले ही पार्टी और सदन छोड़ चुके थे। जुलाई में ये तीनों BJP में शामिल हुए, और उसी दिन BJP ने इन्हें अपने उपचुनाव उम्मीदवार भी बना दिया।
कोयल चौथी TMC सांसद थीं जिन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दिया। उन्होंने 16 जुलाई को दिल्ली जाकर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंपा। नियम के मुताबिक सदस्य को इस्तीफा खुद पेश करना होता है, इसलिए ईमेल भेजने के बाद भी उन्हें व्यक्तिगत रूप से जाना पड़ा। इस्तीफे के फौरन बाद वे केंद्रीय मंत्री और बंगाल के लिए BJP के केंद्रीय पर्यवेक्षक भूपेंद्र यादव से मिलीं, और तभी से कयास तेज़ हो गए थे।
एक दिलचस्प बात यह भी है कि कई रिपोर्टों के अनुसार कोयल मल्लिक (Koel Mallick) राज्यसभा की एक भी बैठक में शामिल नहीं हुईं। जिस मॉनसून सत्र में उनका पहली बार सदन में बैठना तय माना जा रहा था, उसके शुरू होने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
सोमवार को कोयल मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के साथ विधानसभा पहुंचीं और पर्चा दाखिल किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। कोयल ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में बंगाल विकास के सफर पर है और वे भी उसमें भागीदार बनना चाहती हैं। उन्होंने राज्यसभा की जिम्मेदारी को बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने युवाओं के पलायन जैसे मुद्दों का भी ज़िक्र किया।
देखिये चुनाव का कार्यक्रम और गणित
चुनाव आयोग ने 22 सितंबर को ऐलान किया था कि बंगाल की इस एक सीट पर उपचुनाव 16 अक्टूबर को होगा। वही दिन महा षष्ठी का भी है, यानी दुर्गा पूजा की शुरुआत। कार्यक्रम इस तरह है:
नामांकन की आखिरी तारीख: 6 अक्टूबर
नामांकन की जांच: 7 अक्टूबर
नाम वापसी की आखिरी तारीख: 9 अक्टूबर
मतदान: 16 अक्टूबर, सुबह 9 से शाम 4 बजे तक, गिनती उसी दिन
रिपोर्टों के अनुसार अब तक किसी और उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया है। अगर यही स्थिति बनी रही तो कोयल निर्विरोध चुनी जा सकती हैं। 294 सदस्यों वाली बंगाल विधानसभा की मौजूदा स्थिति में BJP के लिए सीट जीतना मुश्किल नहीं माना जा रहा। इस सीट का कार्यकाल मूल रूप से 2 अप्रैल 2032 तक का है।
इस पर TMC क्या कह रही है, और BJP का जवाब क्या है?
TMC ने इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने इसे धोखा और गद्दारी कहा। BJP का पक्ष है कि कोयल की छवि साफ है और वे बंगाल के हितों की बात सदन में मजबूती से रखेंगी। BJP को पहले इस बात पर भी जवाब देना पड़ा था कि दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट देने पर उसका पुराना रुख क्या था। पार्टी ने इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बताया है।
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि इस उपचुनाव का मकसद सीट भरने से ज्यादा राज्यसभा के आंकड़ों को लेकर है। जुलाई में आई एक रिपोर्ट के अनुसार बंगाल के उपचुनावों में संभावित जीत के बाद BJP राज्यसभा में बहुमत से सिर्फ कुछ सीट दूर रह जाएगी।
BJP ने उसी दिन उत्तराखंड के लिए भी अपने राज्यसभा उम्मीदवार का ऐलान किया। पार्टी ने वहां की एकमात्र सीट से दिनेश आर्य को उतारा है। यह सीट नरेश बंसल के कार्यकाल के खत्म होने पर खाली हो रही है, जो 25 नवंबर को पूरा होता है। 16 अक्टूबर को ही दूसरे राज्यों की कई सीटों पर भी द्विवार्षिक चुनाव होने हैं।
आगे क्या देखना है…
अब नज़र इस पर रहेगी कि नामांकन की जांच और नाम वापसी के बाद मैदान में कितने उम्मीदवार बचते हैं। अगर मुकाबला नहीं हुआ तो कोयल मल्लिक (Koel Mallick) को निर्विरोध विजेता घोषित किया जा सकता है। उसके बाद बड़ा सवाल यह रहेगा कि सदन में उनकी सक्रियता कैसी रहेगी। अब तक की हाज़िरी के रिकॉर्ड को देखते हुए आलोचक इसी पर सबसे पहले नज़र डालेंगे। फिलहाल इतना तय है कि बंगाल की सियासत में दल-बदल का यह चक्र अभी थमा नहीं है।


