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घरेलू रसोई गैस (LPG) के दाम चार महीने से स्थिर, पर Commercial Cylinders अक्टूबर में फिर महँगा

कमर्शियल सिलेंडर (Commercial Cylinder) 1 अक्टूबर से फिर महँगा

घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) के दाम जून के बाद से नहीं बदले हैं और दिल्ली में 14.2 किलो का सिलेंडर अब भी 942 रुपये में मिल रहा है। लेकिन होटल, ढाबे और रेस्तराँ में इस्तेमाल होने वाला 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर (Commercial Cylinder) 1 अक्टूबर से फिर महँगा हो गया है। पश्चिम एशिया के संकट और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में दाम चढ़े हुए हैं, और इसी का असर देश में गैस की क़ीमतों पर दिख रहा है।

घरेलू सिलेंडर: मार्च और जून में बढ़े थे दाम

इस साल घरेलू सिलेंडर के दाम दो बार बढ़े। न्यूज़ ऑन एयर की रिपोर्ट के अनुसार मार्च में सरकारी तेल कंपनियों ने बिना सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए, जिससे दिल्ली में क़ीमत 853 रुपये से 913 रुपये हो गई। फिर 7 जून से दाम 29 रुपये और बढ़े और दिल्ली में सिलेंडर 942 रुपये का हो गया। यानी मार्च से जून के बीच कुल 89 रुपये की बढ़ोतरी हुई।

उसके बाद से घरेलू दाम स्थिर हैं। द स्टेट्समैन के अनुसार 1 अक्टूबर को भी घरेलू सिलेंडर 942 रुपये पर ही रहा। गुडरिटर्न्स ने लिखा कि घरेलू सिलेंडर के दाम लगातार पाँचवें महीने नहीं बदले। शहर के हिसाब से स्थानीय कर, ढुलाई और वैट के कारण दाम अलग-अलग होते हैं। इसलिए बुकिंग से पहले इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम या एचपीसीएल की वेबसाइट या वितरक से अपने शहर का रेट देख लेना चाहिए।

कमर्शियल सिलेंडर में फिर तेज़ी

इंडिया टीवी के अनुसार 1 अक्टूबर को 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर (Commercial Cylinder) के दाम दिल्ली में 62.50 रुपये बढ़े, और अलग-अलग शहरों में यह बढ़ोतरी 60 से 71.50 रुपये के बीच रही। दिल्ली में इसकी क़ीमत अब 2,810 रुपये प्रति सिलेंडर है। देवभूमि न्यूज़ के अनुसार कोलकाता में इसकी क़ीमत क़रीब 2,954 रुपये हो गई, यानी वहाँ 70 रुपये की बढ़ोतरी हुई। मुंबई में दाम 2,764.50 रुपये रहा, और पटना में सबसे ज़्यादा 71.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई। स्टेट्समैन के अनुसार इससे पहले सितंबर में 9.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी।

इस साल कमर्शियल सिलेंडर के दामों में बड़ा उतार-चढ़ाव दिखा। सोशल न्यूज़ एक्सवाईज़ेड की रिपोर्ट के अनुसार फ़रवरी से जून के बीच इसकी क़ीमत 1,740.50 रुपये से बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गई, जो रिकॉर्ड ऊँचाई थी, और जुलाई-अगस्त में इसमें गिरावट आई। यानी अभी के दाम जून के शिखर से नीचे हैं, लेकिन फ़रवरी के मुक़ाबले काफ़ी ऊपर हैं।

जानिए दाम बढ़ने की वजह

गुडरिटर्न्स के अनुसार इस बढ़ोतरी की वजह कच्चे तेल के ऊँचे दाम और अमेरिका-ईरान टकराव के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तेल-गैस की ढुलाई में आई रुकावट है। रिपोर्ट के मुताबिक़ इस हफ़्ते ब्रेंट कच्चा तेल क़रीब 108 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुँच गया। तेल कंपनियाँ हर महीने की पहली तारीख़ को एलपीजी के दाम की समीक्षा करती हैं। इसका आधार अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क दाम और रुपये-डॉलर की विनिमय दर होती है।

जून में दाम बढ़ने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा था कि घरेलू उपभोक्ताओं को अब भी बड़ी राहत मिल रही है। मंत्रालय के अपर सचिव प्रवीण माल खनूजा ने अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता में कहा था: “मुझे जो सिलेंडर 1,600 रुपये का पड़ना चाहिए था, वह 942 रुपये में मिल रहा है।” यह कथन अंग्रेज़ी रिपोर्ट से अनूदित है। इंडिया डॉट कॉम के अनुसार केंद्र ने बताया कि सामान्य उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर क़रीब 700 रुपये और उज्ज्वला लाभार्थियों को क़रीब 1,000 रुपये का अप्रत्यक्ष सहारा मिलता है।

उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को साल के पहले चार रिफ़िल पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलती है, जिससे दिल्ली में उनके लिए क़ीमत 642 रुपये बैठती है। इसी रिपोर्ट के अनुसार सरकार का कहना है कि आपूर्ति की असली लागत 1,600 रुपये के पार जा चुकी है। तेल कंपनियों के घाटे को लेकर डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दी क्विंट ने लिखा कि जून की बढ़ोतरी से पहले कंपनियों को हर घरेलू सिलेंडर पर क़रीब 703 रुपये का नुक़सान हो रहा था।

सप्लाई और बुकिंग के नियम

क़ीमतों के साथ आपूर्ति भी इस साल बड़ी चिंता रही। आज तक की मार्च की रिपोर्ट के अनुसार ईरान युद्ध के बीच कई शहरों में घबराहट में सिलेंडर की बुकिंग बढ़ गई, हालाँकि सरकार और जानकारों का कहना था कि असल में कोई कमी नहीं है। सरकार ने बुकिंग के नियम बदले। आज तक के अनुसार दो रिफ़िल के बीच का न्यूनतम अंतर पहले 21 दिन किया गया और बाद में बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया। मौजूदा समय में यह नियम किस रूप में लागू है, इसकी पुष्टि अपनी गैस एजेंसी से कर लेना बेहतर होगा।

सरकार ने कहा कि वह घरेलू एलपीजी और पाइप से मिलने वाली गैस को प्राथमिकता दे रही है। आउटलुक मनी की रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय ने बताया कि जमाखोरी और कालाबाज़ारी के ख़िलाफ़ 3,700 से ज़्यादा छापे मारे गए, क़रीब 1,000 कारण बताओ नोटिस जारी हुए और 27 डीलरशिप निलंबित की गईं।

जुलाई-अगस्त में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज़ रही। नवभारत लाइव के अनुसार केंद्र सरकार ने कहा कि देश में पर्याप्त सिलेंडर हैं और किसी को घबराने की ज़रूरत नहीं है, जबकि विपक्षी सांसदों ने संसद के बाहर इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। अलग-अलग रिपोर्टों में आपूर्ति को लेकर अलग-अलग तस्वीर दिखी। प्रभात ख़बर के अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव ने कहा कि घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सामान्य रूप से चल रही है। नवभारत लाइव की एक रिपोर्ट में सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया कि आपूर्ति शृंखला को पूरी तरह सामान्य होने में तीन से चार साल लग सकते हैं। इस आख़िरी दावे पर सरकार की ओर से अलग से पुष्टि नहीं दिखी।

आम लोगों और कारोबारियों पर असर

घरेलू उपभोक्ताओं पर फ़िलहाल कोई नया बोझ नहीं है। पर कमर्शियल सिलेंडर (Commercial Cylinder) के दाम बढ़ने से त्योहारों के मौसम में होटल, ढाबे, कैटरिंग और खाने-पीने के छोटे कारोबारों की लागत बढ़ सकती है। इंडिया टीवी ने लिखा कि इस सिलेंडर का इस्तेमाल होटल, रेस्तराँ और ढाबों में होता है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने से उनके संचालन ख़र्च पर असर पड़ सकता है। यह बोझ आगे ग्राहकों के बिल तक पहुँचेगा या नहीं, यह कारोबारियों के फ़ैसले पर निर्भर करेगा।

देश में एलपीजी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। डेक्कन हेराल्ड के अनुसार मार्च 2025 तक देश में क़रीब 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे, जिनमें 10.33 करोड़ उज्ज्वला श्रेणी में थे। गल्फ न्यूज़ के अनुसार भारत अपनी घरेलू एलपीजी खपत का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है और यहाँ गैस की क़ीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ी है। यह आँकड़ा पिछले साल की रिपोर्ट का है, इसलिए हालिया स्थिति में अलग हो सकता है। इसी वजह से वैश्विक संकट का असर सीधे भारतीय रसोई तक पहुँचता है। डेक्कन हेराल्ड के अनुसार 2024-25 में सब्सिडी वाले रेट पर घरेलू एलपीजी बेचने से तेल कंपनियों को 28,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

अब सबकी नज़र 1 नवंबर की समीक्षा पर रहेगी, जब तेल कंपनियाँ दोबारा दाम तय करेंगी। घरेलू सिलेंडर के दाम कब तक स्थिर रहेंगे, यह अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार और होर्मुज़ के हालात पर निर्भर करेगा। मंत्रालय बार-बार कह चुका है कि घबराकर बुकिंग करने की ज़रूरत नहीं है। उपभोक्ताओं को सलाह है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट या अपने वितरक से मिली जानकारी पर भरोसा करें।

नवंबर की समीक्षा के बाद नए दाम आने पर यह रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।


नोट: यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से प्रकाशित समाचारों और सरकारी बयानों पर आधारित है। गैस सिलेंडर के दाम शहर, राज्य और कर के हिसाब से अलग होते हैं और हर महीने बदल सकते हैं। यहाँ दिए गए रेट मुख्य रूप से दिल्ली के हैं। बुकिंग के नियम और सब्सिडी की शर्तें समय के साथ बदल सकती हैं, इसलिए ताज़ा जानकारी के लिए अपनी गैस एजेंसी या तेल कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

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