इस साल का मॉनसून (Monsoon) 2026 आया भी खटके के साथ और गया भी हिसाब बराबर करके। जून से सितंबर तक चले सीज़न का आखिरी आंकड़ा आ गया है और तस्वीर बहुत उत्साह वाली नहीं है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक पूरे देश में इस बार लंबी अवधि के औसत यानी LPA की 87% बारिश हुई। सीधे शब्दों में, करीब 13% पानी कम बरसा। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने तो इसे हल्के सूखे जैसी स्थिति तक कह दिया है। जो लोग सोच रहे थे कि सितंबर की झड़ी सारी कमी पूरी कर देगी, उनके लिए यह थोड़ी निराशा की खबर है।
पहले से मिल चुके थे संकेत कि कैसा रहेगा मौसम
अगर आप मौसम की खबरों पर नज़र रखते हैं तो यह नतीजा बहुत चौंकाने वाला नहीं लगेगा। अप्रैल में IMD ने अपने पहले अनुमान में बताया था कि बारिश LPA की करीब 92% रह सकती है। फिर 29 मई को अनुमान और घटाकर 90% कर दिया गया। वजह थी El Niño, यानी प्रशांत महासागर के पानी का असामान्य रूप से गर्म होना, जिसका असर भारत के मॉनसून पर अक्सर उल्टा पड़ता है। मई के आखिर में मॉडलों में El Niño के बनने की संभावना करीब 92% बताई गई थी। यानी चेतावनी पहले ही दे दी गई थी। फर्क इतना रहा कि असल बारिश अनुमान से भी कुछ कम निकली।
एक बात समझ लेना ज़रूरी है। IMD के हिसाब से 96 से 104% के बीच की बारिश को “सामान्य” माना जाता है। इस पैमाने पर 87% साफ तौर पर सामान्य से नीचे है। देश में पिछली बार मॉनसून सामान्य से नीचे 2023 में रहा था, जो एक और El Niño वाला साल था। तब बारिश LPA की 94% रही थी। इस बार कमी उससे ज्यादा गहरी है।
वैसे सब जगह एक जैसा हाल नहीं
देशभर का औसत एक बात बताता है, लेकिन ज़मीन पर हालात अलग-अलग रहे। स्काईमेट के आंकड़ों के मुताबिक देश के करीब आधे हिस्से में बारिश सामान्य से कम रही। दूसरी तरफ ओडिशा में LPA से 30% ज्यादा पानी गिरा। यानी कहीं किसान आसमान ताकते रहे और कहीं ज़रूरत से ज्यादा बारिश झेलनी पड़ी। मॉनसून की यही बेतरतीबी हर साल खेती की सबसे बड़ी चुनौती है। औसत के पीछे छिपा यह फर्क ही असली कहानी है।
हमारे देश की खेती का बड़ा हिस्सा आज भी बारिश के भरोसे चलता है। इसीलिए मॉनसून को सिर्फ मौसम की खबर नहीं माना जाता। यह खरीफ की फसल, ग्रामीण आमदनी और खाने-पीने की चीज़ों के दामों तक से जुड़ा है। कम बारिश का मतलब हर बार संकट नहीं होता। सिंचाई के साधन और बेहतर बीज कई जगह असर घटा देते हैं। फिर भी कमी लंबी चले तो नमी, जलाशयों का स्तर और आने वाली रबी की बुआई पर फर्क पड़ सकता है। इसलिए आने वाले हफ्तों में जलाशयों और फसल के आंकड़ों पर नज़र रहेगी।
जानिए विदाई कहां तक पहुंची
मॉनसून (Monsoon) 2026 की वापसी इस बार 19 सितंबर से शुरू हुई। 2 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार विदाई की रेखा गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुज़फ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर और डीसा के आसपास से गुज़र रही थी। मौसम विभाग ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान व उत्तर प्रदेश के बचे हिस्सों से आगे की विदाई के हालात बन रहे हैं। आम भाषा में कहें तो उत्तर भारत में मॉनसून अब बिस्तर समेट रहा है।
एक नियम भी जानने लायक है। IMD के मुताबिक पूरे देश से मॉनसून की पूरी विदाई तभी मानी जाती है जब दक्षिणी प्रायद्वीप से भी हवाओं का पैटर्न बदले, और यह 1 अक्टूबर के बाद ही होता है। इसलिए दक्षिण में अभी बारिश का दौर चल रहा है, जो अपने आप में सामान्य बात है।
देखिये इस हफ्ते का मौसम
विदाई के बावजूद पूरी तरह साफ आसमान की उम्मीद मत रखिए। IMD के अनुमान के अनुसार 6 से 8 अक्टूबर के बीच हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में हल्की से बिखरी हुई बारिश हो सकती है। पंजाब में यही सिलसिला 7-8 अक्टूबर को रहेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 6-7 अक्टूबर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5 से 8 अक्टूबर के बीच बारिश के आसार हैं। उत्तराखंड में 7 अक्टूबर को कई जगह अच्छी बारिश हो सकती है, और हिमाचल में 5 से 8 अक्टूबर के बीच।
दक्षिण में हालात थोड़े गंभीर हैं। केरल और माहे में 2 से 6 अक्टूबर तक काफी जगह बारिश का अनुमान है, और 4 से 6 अक्टूबर के बीच भारी बारिश भी हो सकती है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 4-5 अक्टूबर को कुछ जगह भारी बारिश की चेतावनी थी। पूर्वोत्तर में अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश, गरज और बिजली का खतरा बना हुआ है। जहां भारी बारिश की चेतावनी है, वहां सफर से पहले मौसम की ताज़ा जानकारी देख लेना ठीक रहेगा।
आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब
अक्टूबर की बारिश कई बार दो तरह से असर करती है। पकी हुई फसल कटाई के वक्त भीग जाए तो नुकसान होता है, वहीं हल्की बारिश रबी की तैयारी के लिए मिट्टी में नमी भी देती है। इसलिए जिन किसान भाइयों की फसल खेत में खड़ी है, वे अगले दो-तीन दिन का पूर्वानुमान ज़रूर देखें। शहर वालों के लिए बात सीधी है। बारिश के बाद उमस और मच्छर बढ़ते हैं, इसलिए पानी जमा न होने दें और बेवजह के सफर में छाता साथ रखें।
मॉनसून का सीज़न खत्म होने के बाद अब अगली नज़र पूर्वोत्तर मॉनसून पर रहती है, जिससे दक्षिण भारत के कई राज्यों में अक्टूबर से दिसंबर के बीच अच्छी बारिश होती है। उसका अनुमान और ताज़ा अपडेट IMD की वेबसाइट mausam.imd.gov.in पर मिल जाएंगे। कुल मिलाकर 2026 का मॉनसून याद रखा जाएगा एक ऐसे साल के रूप में, जिसमें चेतावनी पहले मिली, बारिश कम हुई और पानी का बंटवारा बेहद असमान रहा।



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